शनिवार, 5 जुलाई 2008

एक पत्र चरित्र वालो के नाम

रजनीस जी नमस्कार,

आप गुम रहे इसलिए सहयोग के आकांक्षियो को कुछ लानत नही भेज सके इसका दुख आपको होगा इसका आभास मुझे है।आप ही भडास मे एक "चरित्रवान" ब्यक्ति है जिसको अपने साथियो की मदद के लिये पत्रकार बिरादरी से कोई सहयोग राशि लेना मंजूर नही। आपको करुणाकर भाई के लिए भी यह मंजूर नही होता अच्छा हुआ आप उनसे दूर ही रहे है। भडास और भडासी भाईयो को धन्यवाद की उन्होने किसी को अछूत नही माना और भाई करुनाकर के लिये जिन्होने हाथ बढाया उनका उन्होने स्वागत किया।
शेष फ़िर कभी.......
उमेश सोनी

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