रविवार, 25 मई 2008

दाईयाँ

एक शहर जिसकी आबादी लगभग 15 लाख और सौ से ज्यादा छोटे बडे अस्पताल जिसमे मेटर्निटी होम भी शामिल है। यहाँ के हालात भी उन शहरो से भिन्न नही है। यहाँ के डाक्टर भी उन्ही जैसे व्यवसायिक है जैसे हिन्दुस्तान के अन्य शहरो के डाक्टर है। यहाँ दाईयाँ को अब कोई याद नही करता।दाइया रोजी रोटी के लिये या तो मजदूरी कर रही हैँ या भीख माग रही है। प्रसव कराने मे उनकी कोई भी भूमिका नही है। यही हालात कस्बो और छोटे शहरो के हैँ। गावोँ की दशा थोडा भिन्न है जिसके कारण आज भी दाईयाँ याद कर ली जाती है। एक समय था जब प्रसव के लिये दाईयो और बुजुर्ग महिलाओ की मदद ली जाती थी तब भी मौत के आकँडे आज जैसे ही थे। आज जब डाक्टरो की फौज है तब भी आकडे वही है। घर मे प्रसव होने पर सम्बन्धी आत्मीयता के साथ पेश आते थे अब नर्से डायन की तरह व्यवहार करती है। दाईयो को मुख्य धारा मे शामिल कर अस्पताल मे इनके सहयोग से प्रसूति वास्तव मे सुखद हो सकती है।

मंगलवार, 6 मई 2008

हास्टल की लडकियाँ समलैंगिकता और शराब खोरी मे मस्त।

तहलका हिन्दी .काम मे हास्टल मे रहने वाली छात्राओँ की निजी जिन्दगी पर लेख लिखा गया है।इस लेख मे वह सब कुछ चित्रित हुआ है जिसके कारण भारतीय नारी की परम्परा वादी छवि की धारणा टूटी है\ समलैंगिक सम्बन्ध ,शराब खोरी धूम्रपान जैसी बुराइओँ मे आकंठ डूबी इन महिलाओ को पश्चिम के नतीजो पर नजर डालनी चाहिए।अब आप सोंचे अगर यह आधुनिक हिन्दुस्तान की आधुनिक नारियोँ की तस्वीर है। जो महिलायँ शराब खोरी और धूम्रपान मे डूबी होँ उनकी संताने कैसी होगी इसकी कल्पना सहज ही की जा सकती है। अभी तक पिता की शराब खोरी के दुष्प्रभाव का नतीजा संतानो को भोगना पडता था अब माताओ की स्वेच्छाचारिता का पाप भी संताने भुगतेगी। भारत मे अब अवैध संतानो की संख्या मे लगातार बढोत्तरी होगी क्योकी स्त्री शराब खोरी करके बेहोसी मे पुरुषो के साथ मौज करेंगी अवैध संतानो को जन्म देगी। ए समस्याएँ नई तरह की होगी जिससे समाज और सरकार को निपटना पडेगा।